बुधवार, 6 अप्रैल 2011

6-KAVITA

श्वासों के दीप मे
आस का उजाला होने दो,
रोको न कोई मुक्त चक्षु,
आज उन्हें खो लेने दो
भोर का नाजुक अन्धेरा,
ले रहा अंगडाई सूरज,
आने लगी परछाई नभ पर,
जीवन उमग परिहास भर कर,
श्रष्टि की वेदना का समागम,
न हो पाए इस समय,
व्योम को उमंगो की छाव में,
खो लेने दो,जी लेने दो,
आज वेदना हो लेने दो,
चक्षुओ से नदी का बहाव रोको नहीं,
उसको समंदर हो लेने दो,
वादिओ में खो लेंने  दो,
पाने को कुछ अपनी साँसे,
खुद का खुद को हो लेने दो,
समाया हे जो साँसों में तूफा,
भोर की किरणों में हो लेने दो,
श्वासों के दीप में आस का उजाला हो लेने दो.
----भारती









5-KAVITA

नहीं मुमकिन उसे,शब्दों में बाँध पाना,
नहीं मुमकिन उसे ख्वाबों में जान पाना,
तूफ़ान है वो समंदर है,
अहसास की आंधी का किनारा,
वो जिंदगी की रेत का गलीचा,
जिसमे लिखा है नाम मेरा,
तूफा है जो ले जाता है
कुछ नाम भी साथ अपने,
एक तूफा जो ले जाएगा,
लहरों पे गिनते हुए अहसास कुछ,
मेरे अस्तित्व की परिभाषा,
अहसास भर है किसी का,
किन्तु जो मेरा है,वो
 कहा अपना है,
यह अहसास ही तो
 आलम का अजूबा है.
---भारती





रविवार, 3 अप्रैल 2011

4-kavita

कैसे भूल जाए कि इंसान है हम,
बुद्ध नहीं की समा जाए उस बोध में
कैसे भूल जाये कि इंसान है हम,
राम नहीं कि सीता को न देख पाए उम्र भर,
भूलने नहीं देता आजादी का अहसास हमें
हम कान्हा नहीं कि बांसुरी में समाये,
और श्रष्टि को अपने सुरों से नचाये,
हम तो खुदको ही ढूँढने जा रहे है,
कुछ हसरतों को साधने जा रहे है,
एक इंसान मिल जाए तो आइना समझ लेंगे,
हम तो खुद को ही बांटने जा रहे है.
-----भारती









3-astitva

अस्तित्व के अहसास की आकांक्षा'
फुर्सतो  की fitratoan के फासले,
जानने को ज़िन्दगी की हरकती जुनूनी,
जीने की आरज़ू के रूबरू कुछ ख्वाब,
देखने की हसरतें समंदर का चेहरा,
या की फिर थाह उस आशमां  की,
हम ,खुद मे ही समाये हुए थे,
जो हमारी जुदा आवाज़ का अंदाज़ है,
कैसे खुदाया देख पाते उस जहा को,
ज़हा की बूँद का पैगाम हम खुद ही थे.
---भारती








2-kavita

वोह अदम्य वोह अगोचर,
वोह अखंडित साहसी,
वोह विश्वास का किनारा,
वोह आस्था का सहारा,
वो पतवार की नाव सी,
एक साहसी हुंकार सी,
एक बूँद आस सी,
वोह धड़कन और श्वाश सी,
वोह ममता का किनारा,
वोह एकलव्य का सहारा,
गिरता,पड़ता, पर सम्हलता
चला जा रहा जीवन पथ पर'
वो एक ज्योति,एक सांस सी,
वो सपनो का सहारा, वो कोशिश का किनारा
वो जीवन की एक मदमस्त राग सी,
वो अहम् ब्रहामास्मी,वो मेरी हर सांस सी.

---भारती



1-kavita

वह एक सपना है,
आसमां उसका अपना है,
मै ज़मीं हूँ,
हकीकत  मे पली हूँ
मिल पाए ज़मी से आसमां
मुमकिन नहीं,
कोई सपना आसमां
 हो जाए  मुमकिन नहीं !

----भारती